Thursday, May 2, 2019

मीनाक्षी शेषाद्रि के साथ रेशमा पठान

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' के नारे से सुप्रीम कोर्ट को जोड़ने के मुद्दे पर एक बार फिर खेद जताया है.
राहुल गांधी ने पिछले हफ़्ते भी इस मामले में खेद जताया था मगर अदालत ने मामले को बंद करने से इनकार करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था जिसके बाद राहुल गांधी ने अदालत में एक ऐफ़िडेविट में अपनी सफ़ाई रखी.
उन्होंने आरोप लगाया कि अवमानना की कार्यवाही के नाम पर याचिकाकर्ता बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी राजनीति कर रही हैं.
अपनी पिछली दलील को दोहराते हुए राहुल गांधी ने ऐफ़िडेविट में कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान वो उत्तेजना में ये बोल गए कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है.
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ कथित तौर पर चुनाव आचारसंहिता के मामले की सुनवाई करेगा.
कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि वो इस बारे में चुनाव आयोग को निर्देश दे.
उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि मोदी और शाह के ख़िलाफ़ कई शिकायतों के बावजूद चुनाव आयोग इस बारे में कोई भी कार्रवाई करने में नाकाम रहा.
उन्होंने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल को गुजरात में चुनाव के दिन भी एक रैली की जो आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है.
15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई फ़िल्म शोले को कौन भूल सकता है? इस फ़िल्म का एक मशहूर दृश्य है, जिसमें बसंती के पीछे गब्बर सिंह के डाकू पड़ जाते हैं और बसंती अपनी घोड़ी 'धन्नो' से कहती है कि 'भाग धन्नो भाग... आज तेरी बसंती की इज़्ज़त का सवाल है'.
और तब बसंती यानी हेमा मालिनी अपने तांगे को बहुत तेज़ दौड़ाती हैं और पत्थर से टकराकर तांगा टूट जाता है.
इस जोखिम भरे दृश्य को बड़े परदे पर हेमा मालिनी ने नहीं उनकी बॉडी डबल रेशमा पठान ने निभाया था. इस दृश्य को निभाते वक़्त वो सच में तांगे के नीचे आ गई थीं और मरते-मरते बची थीं.
फ़िल्मों में बॉडी डबल होते हैं जो हीरो और हीरोइन के लिए मुश्किल स्टंट्स को अंजाम देते हैं. रेशमा ने कई ख़तरनाक स्टंट किए हैं जैसे, कमज़ोर पहियों के साथ तांगा चलाना, घुड़सवारी, ऊँची इमारतों से नीचे गिरना, तलवारबाज़ी, फ़ाइट सीन, रस्सी पर चढ़ना और चलती गाड़ी से कूदना और सांड और शेर से लड़ाई.
रेशमा बताती हैं, "तांगे वाले सीन में पहिया पत्थर से टकराता है और दोनों पहिये टूट जाते हैं और हेमाजी नीचे गिर जाती हैं लेकिन हुआ कुछ अलग. बात ये थी कि जिसने तांगा बनाया था उसे पहियों को मज़बूती से नहीं जोड़ना था लेकिन उन्होंने ग़लती से एक पहिये को लोहे की कील से मज़बूत बना दिया जिसके चलते पत्थर से टकराने के बावजूद एक पहिया नहीं टूटा और घोड़ा दौड़ाने और घोड़े की रस्सी खोलने के बाद तांगा टूटा नहीं बल्कि पत्थर से टकराकर उलट गया और पूरा तांगा मेरे ऊपर आ गया."
"ये घटना इतनी ज़ोर से हुई कि वहां मौजूद लोगों को लगा कि मैं अपनी जान से हाथ धो चुकी हूँ, लेकिन जब लोग मुझे बचाने आए तो सबने मिलकर तांगा सीधा किया और देखा कि मेरी साँसें चल रही हैं. मुझे जल्दी से अस्पताल ले जाया गया."
अमृता सिंह और विनोद खन्ना की फ़िल्म 'सीआइडी' में एक सीन में अमृता सिंह ने पहली मंज़िल से छलांग लगाई है.
दरअसल, वह सीन बॉडी डबल के रूप में रेशमा ने ही निभाया था. तब वो पांच महीने की गर्भवती थीं.
रेशमा बताती हैं, "बहुत छोटी उम्र में ही मेरी शादी हो गई थी और मेरी देखभाल और समझाने वाला कोई नहीं था. पैसों की ज़रूरत भी थी. भाई बहनों की पढ़ाई और परिवार की देखरेख की ज़िम्मेदारी थी."
"इस स्टंट को करने के बाद मुझे पेट में दर्द हुआ और मैं डॉक्टर के पास गई तब डॉक्टर ने मुझे समझाया ऐसा करना तुम्हारे बच्चे और तुम्हारे लिए ख़तरनाक है. तभी मैंने कुछ समय के लिए काम करना बंद कर दिया और जैसे ही मेरा बच्चा 3 महीने के ऊपर का हुआ तो मैंने फिर स्टंट करना शुरू किया. घर के हालात ऐसे नहीं थे कि मैं अपना खयाल रख सकूँ."
रेशमा बॉलीवुड फ़िल्मों की पहली स्टंट वुमन थीं और मूवी स्टंट की पहली महिला मेंबर. इस लाइन में आना और मूवी स्टंट का मेंबर बनना उनके लिए किसी दंगल से कम नहीं था.
रेशमा कहती हैं, "आज कई महिलाएं फ़िल्मों के लिए स्टंट करती हैं लेकिन जब मैंने शुरू किया था 50 साल पहले तब इतना आसान नहीं था. इस लाइन को बहुत बुरा समझा जाता था. लड़कियां तो दूर अच्छे परिवार के लड़कों को भी मंज़ूरी नहीं मिलती थी काम करने की."
"मैं सिर्फ़ 14 साल की थी जब मैंने फ़िल्मों के लिए स्टंट करना शुरू किया था. मुझे आज भी याद है जब हमारे पास एक वक़्त के खाने के लिए भी कुछ नहीं था. मेरे पिता अक्सर बीमार रहते थे और मेरी माँ अक्सर घर में ही रहती थीं. हमेशा पर्दा करती थीं."
"मुझे सबसे पहले मौक़ा देने वाले स्टंट डायरेक्टर अज़ीम गुरु जी थे जिन्होंने मेरे हालात और मेरी क़ाबिलियत देखी. सबसे पहला काम मैंने अभिनेत्री लक्ष्मी छाया जी के लिए किया था और जब मैंने अपने पिता को अपनी पहली कमाई 100 रुपये दिए तब मेरे उन्होंने मुझे और मेरी माँ को बहुत मारा था. मैंने अपने हाथों के छाले उन्हें दिखाए और उन्हें समझाया कि मैंने ज़ख़्म लेकर खून बहाकर पैसे कमाए हैं कुछ ग़लत काम करके नहीं. तब उन्होंने मुझे और मेरे काम को अपनाया."

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